
औली। नेशनल स्कीइंग चैंपियनशिप एवं विंटर कार्निवल 2026 के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बर्फ की चादर ओढ़े औली के वातावरण में देवभूमि की लोक संस्कृति की गरमाहट भर दी। तीन दिवसीय इस महोत्सव के दौरान विभिन्न प्रतिष्ठित सांस्कृतिक दलों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया, जिसका समन्वय जीएमवीएन के वरिष्ठ प्रबंधक राहुल बहुगुणा द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ 13 फरवरी को पांडवास कल्चरल टीम और लाता सांस्कृतिक टीम की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियों के साथ हुआ।
महोत्सव के दूसरे दिन 14 फरवरी को परसारी सांस्कृतिक टीम के साथ-साथ दरवान नैथवाल व उनकी टीम ने पारंपरिक नृत्यों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। आयोजन के अंतिम दिन 15 फरवरी को लोक कलाकारों का जमावड़ा रहा, जिसमें जगदीश नैथवाल व उनकी टीम और मातृशक्ति समूह टीम ने पहाड़ की समृद्ध परंपराओं को मंच पर जीवंत किया। गढ़वाल मंडल विकास निगम के महाप्रबंधक लक्ष्मीराज चौहान ने औली विंटर कार्निवल की सफलता और इसके भविष्य के लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड सरकार द्वारा 13 से 16 फरवरी तक आयोजित इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य विंटर टूरिज्म को नई ऊंचाइयां देना है। इस वर्ष नेशनल स्कीइंग चैंपियनशिप में 17 राज्यों की टीमों ने हिस्सा लिया, जिसमें लगभग 250 प्रतिभागियों ने अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। चौहान जी ने कहा कि स्थानीय सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुतियों और निवासियों की बढ़-चढ़कर भागीदारी ने आयोजन में चार चाँद लगा दिए हैं। राज्य सरकार द्वारा विजेताओं के लिए दी जाने वाली इनामी राशि खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन ने सभी स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इस भव्य आयोजन में शामिल कर उचित सम्मान देने का प्रयास किया है, ताकि भविष्य में औली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख शीतकालीन पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित किया जा सके।
विंटर गेम्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हर्षमणि व्यास ने औली में आयोजित नेशनल स्कीइंग चैंपियनशिप और विंटर कार्निवल की सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए इसे उत्तराखंड के शीतकालीन पर्यटन के लिए एक बड़ा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार के सहयोग से आयोजित इस चार दिवसीय (13 से 16 फरवरी) भव्य आयोजन में देश के 17 राज्यों से आए लगभग 250 खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। व्यास जी ने इस बात पर जोर दिया कि इस बार राज्य सरकार द्वारा विजेताओं के लिए प्राइस मनी (नकद पुरस्कार) की विशेष व्यवस्था की गई है, जो खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन और खेलों के प्रति उनके समर्पण को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।
उन्होंने आगे बताया कि इस महोत्सव में खेल प्रतियोगिताओं के साथ-साथ स्थानीय सांस्कृतिक टीमों की भागीदारी और निवासियों के उत्साह ने इसे एक व्यापक स्वरूप प्रदान किया है। उनका मानना है कि इस तरह के राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों से स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों को मंच मिलने के साथ-साथ औली को अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक बेहतरीन विंटर स्पोर्ट्स हब के रूप में पहचान मिलेगी। भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सरकार और एसोसिएशन का संयुक्त प्रयास ‘विंटर टूरिज्म’ को बढ़ावा देना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कहा कि हम औली को अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्कीइंग गंतव्य के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। वे बताते हैं कि उनकी एसोसिएशन और अन्य राज्यों के सहयोगियों ने विचार-विमर्श के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि उत्तराखंड में एक ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्कीइंग’ की स्थापना करना बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि जब तक यहां एक राष्ट्रीय संस्थान नहीं होगा, तब तक औली को वह पेशेवर स्वरूप और रखरखाव नहीं मिल पाएगा जिसकी कल्पना इसे बनाते समय की गई थी। वे उत्तराखंड सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को इसका प्रस्ताव भेजने की बात कर रहे हैं, ताकि गुलमर्ग (ISM) और हिमाचल के संस्थानों की तर्ज पर औली में भी उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। व्यास जी ने पर्यटन विभाग के भीतर स्कीइंग और पर्वतारोहण के लिए एक समर्पित और सशक्त प्रभाग की आवश्यकता भी जताई है, ताकि औली अपने वास्तविक और भव्य स्वरूप में दुनिया के सामने आ सके।

