वाराणसी में आयोजित संस्कृति संसद एवं अंतरराष्ट्रीय जैन जी कॉन्क्लेव में प्रतिभाग कर रहे बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, 4 नवंबर को संत-महापुरुषों के सानिध्य में होंगे सम्मानित

ज्योर्तिमठ/ गोपेश्वर/ देहरादून 3 नवंबर।श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) उपाध्यक्ष तथा श्री ज्योर्तिमठ पीठ पुरोहित पंडित ऋषि प्रसाद सती वाराणसी में बीते सोमवार 2 नवंबर से आयोजित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रतिभाग कर रहे हैं। इन कार्यक्रमों का आयोजन भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा एवं राष्ट्रीय एकता के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से किया जा रहा है। कार्यक्रमों में देशभर के संत-महात्मा, धर्माचार्य, विद्वान एवं विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति सहभागिता कर रहे हैं।

वाराणसी के रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र में गंगा महासभा के तत्वावधान में आयोजित संस्कृति संसद-2026 तथा अंतरराष्ट्रीय जैन जी कॉन्क्लेव में सनातन संस्कृति के संरक्षण, राष्ट्र निर्माण और युवा चिंतन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श हो रहा है। यह आयोजन 3, 4 एवं 5 नवंबर तक चलेगा। आयोजन को अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं श्री काशी विद्वत परिषद का मार्गदर्शन प्राप्त है।

बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती को उनके धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में योगदान के लिए 4 नवंबर को संत-महापुरुषों के सानिध्य में सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर देश के अनेक प्रतिष्ठित संतों, धर्माचार्यों एवं विद्वानों की उपस्थिति रहेगी। यह सम्मान उत्तराखंड की देवभूमि की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के लिए भी गौरव का विषय माना जा रहा है।

ऋषि प्रसाद सती ने इस आयोजन में सहभागिता को अपना सौभाग्य बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा हमारी अमूल्य धरोहर हैं। इनका संरक्षण और भावी पीढ़ियों तक इनका संदेश पहुंचाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि संतों एवं विद्वानों के सानिध्य में ऐसे आयोजनों से समाज में आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिलती है।

ऋषि प्रसाद सती के वाराणसी में आयोजित इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में सहभागिता एवं सम्मान की सूचना पर विभिन्न धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के पदाधिकारियों, संत-महात्माओं तथा अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। लोगों ने इसे उत्तराखंड और विशेष रूप से सीमांत जनपद चमोली के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

 

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