स्रोत से घर तक स्वच्छ पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करें: जिलाधिकारी

 

स्रोतों के साथ घरों से भी रैंडम सैंपलिंग कर पेयजल गुणवत्ता की होगी नियमित जांच

 

जनपद में स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी श्री गौरव कुमार ने शुक्रवार को वी.सी. सभागार गोपेश्वर में जल संस्थान, जल निगम, नगर निकायों एवं चिकित्सा विभाग सहित अन्य सम्बंधित विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।

 

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को पेयजल की गुणवत्ता की नियमित निगरानी करने तथा किसी भी स्तर पर दूषित पेयजल की संभावना को तत्काल समाप्त करने के निर्देश दिए। उन्होने गोपेश्वर, जोशीमठ एवं बद्रीनाथ में सीवर लाइन एवं पेयजल आपूर्ति लाइन के इंटरसेक्शन प्वाइंट का चिन्हीकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि सीवर एवं पेयजल लाइनों में कहीं भी किसी प्रकार का लीकेज न हो और दोनों लाइनों के बीच किसी भी तरह का रिसाव अथवा संपर्क होने की स्थिति उत्पन्न न हो।

 

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि जनपद में पेयजल की गुणवत्ता की जांच के लिए दो विभागीय प्रयोगशालाएं संचालित हैं। इसमें चमोली में जिला स्तरीय प्रयोगशाला तथा कर्णप्रयाग में उप-जिला स्तरीय प्रयोगशाला शामिल है। जनपद के 1,113 गांवों में 1,756 पेयजल स्रोतों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की जा रही है।

 

जिलाधिकारी ने ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जल समितियों की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल पेयजल स्रोतों से ही नहीं, बल्कि घरों तक पहुंचने वाले पानी के भी रैंडम सैंपल लिए जाएं, ताकि स्रोत से लेकर उपभोक्ता तक पेयजल की गुणवत्ता की वास्तविक स्थिति का पता चल सके।

 

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेयजल स्रोतों को किसी भी प्रकार के प्रदूषण से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। संबंधित क्षेत्रीय अधिकारी पेयजल स्रोतों का नियमित निरीक्षण करें और यदि कहीं भी दूषित होने की संभावना दिखाई देती है तो तत्काल कार्रवाई करें। साथ ही, पेयजल गुणवत्ता जांच प्रयोगशालाओं को आवश्यक संसाधनों एवं तकनीकी व्यवस्थाओं के साथ अपडेट रखने के निर्देश भी दिए, ताकि जांच के आंकड़े सटीक एवं विश्वसनीय प्राप्त हो सकें।

 

जिलाधिकारी ने सभी अधिशासी अधिकारियों को नगरीय क्षेत्रों में ऐसे स्थानों को चिन्हित करने के निर्देश दिए जहां पेयजल के दूषित होने की संभावना हो। उन्होंने कहा कि संभावित जोखिम वाले स्थानों की नियमित निगरानी करते हुए आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

 

बैठक में अधिशासी अभियंता जल निगम राजेश सिंह, अधिशासी अभियंता जल संस्थान संजय कुमार सैनी, डॉ. अभिषेक गुप्ता, अधिशासी अधिकारी अनिल कुमार पंत सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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